देश में हर 10 में से 8 यात्राएं तीर्थ और इलाज के लिए

देश में हर 10 में से 8 यात्राएं तीर्थ और इलाज के लिए

घरेलू पर्यटन सर्वे: देश में हर 10 में से 8 यात्राएं तीर्थ और इलाज के लिए, सैर-सपाटे के लिए महज 2 टूर; मेडिकल टूरिज्म पर सबसे ज्यादा खर्च

नई दिल्ली: 'विश्व पर्यटन दिवस' के मौके पर राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSSO के 80वें दौर) द्वारा जारी घरेलू पर्यटन सर्वेक्षण ने देश में यात्राओं के स्वरूप की दिलचस्प तस्वीर पेश की है। देश की जीडीपी में 5.22 प्रतिशत योगदान और 8.46 करोड़ रोजगार से जुड़ा यह सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है। सर्वे के मुताबिक, भारत में होने वाली हर 10 में से करीब 8 ओवरनाइट यात्राएं (रात बिताने वाली) तीर्थाटन और मेडिकल इलाज के लिए की जाती हैं, जबकि सिर्फ 2 यात्राएं सैर-सपाटे और मनोरंजन के लिए होती हैं।

सैर से दोगुना महंगा इलाज का सफर

आंकड़ों के अनुसार, चिकित्सा से जुड़ी यात्राएं सबसे महंगी साबित हो रही हैं। इलाज के लिए प्रति यात्रा औसत खर्च 32,167 रुपये दर्ज किया गया, जबकि टूर-मनोरंजन पर यह 11,723 रुपये, खरीदारी पर 18,981 रुपये और तीर्थ यात्रा पर 7,694 रुपये रहा। खास बात यह है कि मेडिकल टूरिज्म के कुल बजट का करीब 27 फीसदी हिस्सा इलाज के बजाय आने-जाने, ठहरने और खान-पान में खर्च होता है।

उम्र के अनुसार प्राथमिकताओं में भारी अंतर

  • 0-14 वर्ष: बच्चों की हर तीसरी यात्रा (34.7%) सैर-सपाटे के लिए होती है, जबकि इलाज के लिए मात्र 10.4%।

  • 60 वर्ष से अधिक: वरिष्ठ नागरिकों की हर तीसरी यात्रा (32.3%) इलाज के लिए होती है, जबकि मनोरंजन के लिए सिर्फ 8.8%।

  • देश में 80% ओवरनाइट यात्रियों का सफर 5 दिन या उससे कम समय का रहा।

सर्वे के मुताबिक, एक दिन में लौटने वाली ग्रामीण यात्राओं में 29.4% हिस्सेदारी खरीदारी की रही। वहीं, लंबी दूरी की पारिवारिक यात्राओं में 94% लोग होटल के बजाय अपने रिश्तेदारों और जान-पहचान वालों के घरों में ठहरते हैं।